- महाकाल मंदिर पहुंचे अनुपम खेर, शुभांगी दत्त और सिंगर अमित भल्ला: अलग-अलग आरतियों में हुए शामिल, नंदी हॉल में किया पूजन; मांगी मनोकामना
- सिंहस्थ 2028 से पहले कार्रवाई तेज: उज्जैन में 4 अवैध निर्माण ढहाए, 3 को मिला 2 दिन का समय
- महाकाल में भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए दर्शन, गूंजा जयकारा
- उज्जैन में फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल देखने पहुंचे CM मोहन यादव: विजेता को ₹1 लाख, उपविजेता को ₹51 हजार अतिरिक्त इनाम
- सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को नई सौगात: CM मोहन यादव ने 18 करोड़ की सड़क का किया लोकार्पण, कहा - सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर हो रहा विकास
युवक ने शिप्रा नदी में कूदकर की आत्महत्या
इंदौर का युवक शिप्रा में कूदा, सुसाइड नोट में लिखा
मैं कुछ न कर पाया हूं अब जीने की इच्छा नहीं
उज्जैन।इंदौर में रहने वाले युवक ने त्रिवेणी के पुराने छोटे पुल से नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। नागझिरी पुलिस ने नदी से शव बरामद कर उसके पेंट की जेब से पर्स बरामद किया जिसमें सुसाइड नोट लिखा था। मृतक की फोटो सोशल मीडिया ग्रुप में डालने पर शिनाख्त हो पाई। युवक ने सुसाइड नोट में लिखा था कि मैं परिवार के लिये कुछ न कर पाया। अब जीने की इच्छा नहीं है।
विजय पिता रमेश राव 23 वर्ष निवासी रामनगर भमोरी इंदौर कॉलेज का छात्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मां उससे काम धंधा करने के लिये कहती थी। 11 जून को वह घर पर बिना बताये कहीं चला गया। बड़े भाई मुकेश ने बताया कि विजय रात तक घर नहीं लौटा तो थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। साथ ही घर पर उसके बैग की तलाशी ली जिसमें एक सुसाइड नोट लिखा था। विजय ने उसमें लिखा कि मेरे मरने के बाद फोटो भी घर में मत लगाना न ही माला डालना। परिजन उसकी तलाश करते हुए उज्जैन भी पहुंचे। यहां रामघाट पर आरक्षक मोहन सिंह को विजय का फोटो भी दिखाया, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला था।
सेट पर लाश मिलने की सूचना से अलर्ट हुआ आरक्षक
सुबह त्रिवेणी छोटे पुल के पास अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना का सेट पर प्रसारण हुआ तो आरक्षक मोहन सिंह अलर्ट हुआ। उसने नागझिरी पुलिस से संपर्क कर मृतक के फोटो मोबाइल पर मंगाये। यही फोटो विजय के परिजनों को मैसेज किये जिस पर उन्होंने शिनाख्त की और तुरंत उज्जैन पहुंचे।
दूसरा सुसाइड नोट पुलिस को मिला
विजय ने सुसाइड नोट लिखा- दिल में जीने की इच्छा नहीं, मेरा सिर परिवार को मत देना। बेरोजगारी से परेशान आ चुका हूं। परिवार के लिये कुछ नहीं कर पाया। मुकेश ने बताया कि विजय करीब तीन वर्ष पहले भी घर छोड़कर उज्जैन आ गया था। उसे तलाश कर घर ले गये थे।